प्रस्तावित स्थल पर निर्माण नहीं,, 2015 में बने भवन को जेसीबी से ढहाया
सी सी एफ सरगुजा ने कहा औचित्यहीन तोड़ फोड़ पर होगी कार्रवाई
बैकुंठपुर डीएफओ चंद्रशेखर शंकर सिंह परदेशी की मनमानियां इन दिनों ऐसी हो चुकी है। मानो जैसे वन मंडल की जिम्मेदारी बंदर के हाथ उस्तरा लग गया हो। जहां एक तरफ प्रदेश में सुशासन की सरकार का जमकर ढिंढोरा पीटा जा रहा है। तो वहीं दूसरी तरफ सिस्टम में ऐसे अफसरों की तैनाती जो बदतमीज के साथ वाहियात हरकत, मूर्खता सहित मनमानियों से पूरे महकमे में बू मचा रखे हैं। और सुशासन के नाम जमकर पलीता लगा रहे हैं। बात करें तो जिला एमसीबी और कोरिया दोनों वन महकमे के डीएफओ दिमागी तौर पर बीमार और बेहद बदतमीज रवैए के लिए राज्य भर में नामचीन हैं। और जिनसे नेता मंत्री भी अपने सांठगांठ के लिए क्षेत्र की आम जनता के बीच अब चर्चित हो चले हैं। जिसके बाद हालिया हालात ऐसे बन चुके हैं। कि छोटी बड़ी हर समस्याओं और मुद्दों पर आम जनता सड़क पर और भ्रष्टाचारी तंत्र सहित सरकार के नेता मंत्री एक खेमे में नजर आ रहे हैं। वर्तमान में घटित वाक्या पर नजर डालें तो वन मंडल कार्यालय बैकुंठपुर परिषर में सरकारी वाहन चालकों के लिए विश्राम गृह का निर्माण 2015 में कराया गया था। और जिस पूरे भवन की स्थिति भी काफी मजबूत और अच्छी थी। बावजूद इस भवन को बैकुंठपुर रेंजर भगन राम द्वारा जेसीबी मशीन से तोड़वा दिया गया। भवन और पार्किंग दोनों अपनी जगह पर बिल्कुल सही थे। परन्तु रेंजर द्वारा अपनी मनमानी करते हुए। नए स्वीकृत डीएफओ कार्यालय निर्माण के लिए जर्जर और पुराने भवन को छोड़कर वन मंडल प्रांगण की अत्यंत आवश्यक जगह को नया भवन बनाने के लिए बर्बाद किया गया।
रेंजर और डीएफओ एक दूसरे पर लगा रहे आरोप,,,
सारे पहलुओं पर रेंजर भगन राम का कहना है कि डीएफओ परदेशी के आदेश पर 10 वर्ष पूर्व निर्मित भवन को तोड़ा गया। जबकि इस तोड़फोड़ पर डीएफओ परदेशी ने कहा कि रेंजर भगन राम किसी की नहीं सुनता और भवन तोड़ने का आदेश मैने नहीं दिया था। साथ ही डीएफओ यह भी बताया कि निर्माण एजेंसी रेंजर बैकुंठपुर है।भवन तोड़ने की अनुमति उन्होंने ली है। इस प्रकार का ढुलमुल जवाब दोनों जिम्मेदार अफसर दे रहे हैं।जबकि वहीं अगर दूसरी ओर वन मंडल प्रांगण की भौगोलिक स्थिति देखी जाए तो मुख्य द्वार से सीधे सामने डीएफओ कार्यालय,सीधे हाथ पर उप वनमण्डलाधिकारी कार्यालय और पूर्व दिशा की ओर पार्किंग है । जो पूर्णतः उपयुक्त व्यवस्थित है। और पुराने डी एफ ओ कार्यालय के पीछे जो कि काफी पुराना ढांचा है। और जर्जर भी साथ ही डी एफ ओ कार्यालय जैसे बड़े भवन के लिए पर्याप्त भूमि भी परन्तु डीएफओ परदेशी और रेंजर भगन राम ने तोड़फोड़ में खर्च होने की राशि बचाने के उद्देश्य से नव निर्मित भवन को ढहा दिया। नया भवन बनाने की एवज में उपयोग हो रहे भवन को तोड़ने की अनुमति भी किसने और नए भवन का प्रस्तावित स्थल क्या है इसकी जांच भी होनी चाहिए। मामले पर मुख्य वन संरक्षक सरगुजा वन वृत का कहना है कि अगर नए भवन को तोड़ा गया है तो जांच होगी।












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