पूर्व में,,बैकुंठपुर एस डी एम कार्यालय में ऐसे ही बिचौलियों के हाथों गोपनीयता की खुली थी पोल
सोनहत कोरिया – शासन प्रशासन ने मनरेगा में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों की अधिकता के कारण कई संविदा ऑपरेटरों को बाहर का रास्ता दिखा दिया था। उसी श्रेणी के सोनहत मनरेगा कार्यालय में पदस्थ संविदा कर्मचारी थे देवशरण सिंह । जिनकी संविदा सेवा समाप्त कर दी गई थी। परन्तु बीते कई महीनों से देवशरण सिंह ग्रामीण यांत्रिकी विभाग सोनहत की शरण में हैं । और वहां पर इनकी कोई नियुक्ति नहीं है।और ना ही देवशरण को उनके कार्यों की पारिश्रमिक मिलती है। बावजूद इसके आखिर क्या वजह है कि देवशरण सिंह अपना अमूल्य समय देकर बेगारी कर रहे हैं। इस पर जब ग्रामीण यांत्रिकी विभाग सोनहत के एस डी ओ से जानकारी ली गई तो उन्होंने यह तो बताया कि देवशरण विभाग के कर्मचारी नहीं हैं और न ही इन्हें कोई वेतन दिया जाता। पर इसका खुलासा नहीं किया की विभाग इन्हें अपने कार्यालय में सरकारी सेवा हेतु क्यों रखा है ।
विभागीय फाइलों के आवक जावक पंजी में बतौर रिसीवकर्ता हस्ताक्षर करते हैं,,देवशरण सिंह
सूत्रों ने बताया कि देवशरण सिंह आर ई एस विभाग सोनहत कार्यालय में आवक जावक शाखा तो संभालते ही हैं। साथ ही वो विकासखंड स्तर पर पंचायतों या फिर विभागीय कार्यों में ऊपरी कमीशन वसुली के लिए अफसरों के राइट हैंड बने हुए हैं।जिससे सभी की भ्रष्टाचार की दुकान संचालित हो रही है।
सबक के बजाय अफसरों के मनमानी की पुनरावृत्ति चरम पर,,
अवगत करा दें कि इसी प्रकार की घटना और मनमानियों की वजह से बैकुंठपुर एस डी एम कार्यालय में सरकारी दस्तावेज बिचौलिए के सुपुर्द किए जाते थे। और इन्हीं बिचौलियों की वजह से घूसखोरी आमलोगों को परेशान कर रखी थी। जिसकी शिकायत तत्कालीन कोरिया कलेक्टर से की गई थी। तत्पश्चात बैकुंठपुर एस डी एम कार्यालय से बिचौलियों को खदेड़ा गया था। परन्तु ऐसी घटनाओं से सबक लेने के बजाय । सोनहत ग्रामीण यांत्रिकी विभाग के एसडीओ ने विभाग में ऐसे लोगों को सरकारी और गोपनीय दस्तावेजों के बीच बैठा रखा है।












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