कोरिया की बेलगाम अफसरशाही के हाथों कौड़ियों के भाव नीलाम होती सरकारी संपत्ति
बैकुंठपुर कोरिया – अंधेर नगरी और चौपट राजा के साथ लाल बुझक्कड़ की कहानियों को चरितार्थ करती कोरिया जिले की प्रशासनिक व्यवस्था इन दिनों अपनी मनमानियों की चरम सीमा पर बिराजमान है।मानो ऐसा लगता है जैसे बिना राजा की फौज हो गई हो जिले की बागडोर।प्रशासनिक नुमाइंदों की अफसरशाही का ऐसा गुमान की कब आम को इमली साबित कर दें किसी को भनक तक न लगे। बता दें कि ऐसा ही एक मामला कोरिया जिले के लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता और बैकुंठपुर वन मंडल के डीएफओ सहित रेंजर के द्वारा जानबूझकर कारित किया गया है। बता दें कि कोरिया वन मंडल परिषर में वाहन चालक विश्राम भवन का निर्माण वर्ष 2015 में कराया गया था। जो भवन वर्तमान में काफी मजबूत और पूर्ण उपयोग में था । परन्तु नए स्वीकृत हुए डीएफओ कार्यालय भवन के निर्माण हेतु उक्त भवन को क्षतिग्रस्त बताकर और कुछ एडिटेड फोटो लगाकर रेंजर बैकुंठपुर भगन राम खेस के द्वारा लोक निर्माण विभाग से डिस्मेंटल आर्डर जारी करवाकर उक्त भवन को 25 दिसंबर की मध्यरात्रि को जेसीबी मशीन से तोड़वा दिया गया। जबकि उस भवन को तोड़े जाने का औचित्य भी इसलिए नहीं था । क्यों की वर्तमान डीएफओ कार्यालय के पीछे से लगा भवन वन मंडल के स्थापना काल में निर्माण कराया गया था।और जो काफी जर्जर हालत में था। जिसे तोड़कर नया भवन बनाया जाना उचित था । परन्तु रेंजर बैकुंठपुर के द्वारा उपयोग हो रहे भवन को तोड़ दिया गया। मामले में बात सिर्फ रेंजर के मनमानियों की नहीं बल्कि इस पूरे मामले में विभाग के मुखिया अफसर डीएफओ की चुप्पी भी इस कृत्य के लिए मौन स्वीकृति मानी जा रही है। वरना अब तक रेंजर की ऐसी हिमाकत पर रेंजर को बेलगाम कहने के बजाय डीएफओ परदेशी द्वारा कार्रवाई की जा चुकी होती । साथ ही सरकारी पैसे से बने स्ट्रक्चर को एक निश्चित अवधि के पहले ही कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर बिना मौका मुआयना और पंचनामे के जिस तरह आनन फानन में लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता द्वारा भवन तोड़ने की अनुमति दे दी गई। कह सकते हैं कि इन्होंने भी काफी गैरजिम्मेदाराना हरकत का परिचय दिया है। जिसके बाद कहा जा सकता है। कि ऐसे जिम्मेदार अफसरों के मनमानी की ऐसी आदत अब सरकारी माल की बर्बादी और उन्हें कौड़ियों के भाव नीलाम करने की कोशिश के अलावा कुछ नहीं है। चूंकि उक्त भवन के निर्माण को महज 10 वर्ष ही हुआ था । और जिस भवन को जर्जर बताकर तोड़ दिया गया । क्या वह भवन वाकई में जर्जर था या नहीं इस बात कि जांच होनी चाहिए । बता दें कि तोड़ा गया चालक विश्राम भवन और वर्तमान डीएफओ चैम्बर दोनों निर्माण एक साथ और एक ही वर्ष में हुए थे। जिसकी उच्च गुणवत्ता और मजबूती आज भी देखी जा सकती है। और जिसके बाद यह साफ हो जाएगा कि तोड़ा गया भवन न तो क्षतिग्रस्त था और ना ही उसकी गुणवत्ता खराब थी। जांच में यह भी स्पष्ट हो जाएगा की उक्त भवन मात्र और मात्र अफसरशाही और मनमानियों का शिकार हुआ है। और जिसकी भरपाई इन तीनों जिम्मेदारों से वसूल की जानी चाहिए।












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